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Tuesday 24 February 2009

26/11: टेप से खुली आईएसआई की पोल

मुंबई हमलों के मामले में आज तक ने एक बड़ा खुलासा किया है। हमलों के दौरान आतंकियों और पाकिस्‍तान में बैठे उनके आकाओं के बीच हो रही बातचीत का टेप आज तक के हाथ लगा है. इस टेप में रिकॉर्ड बातचीत से साफ पता चलता है कि मुंबई के हमलावरों को पाकिस्‍तान से सारे निर्देश दिए जा रहे थे. ये रिकार्डिंग करीब सात घंटे की है, जिससे ये बिल्कुल साफ हो जाता है कि मुंबई हमले की साजिश रचने वाले आकाओं की सैनिक कुशलता कितनी ज्यादा थी और इस हमले के लिए उन्होंने कितनी बड़ी तैयारी की थी.

मुंबई के आतंकवादियों के फोन चौबीसों घंटे पाकिस्तान में आतंक के वार रूम से जुड़े रहे। पाकिस्तान से कैसे खेला गया आतंक का खूनी खेल, पल-पल कैसे और किसने दी आतंकियों को कमांड, पहली बार आप खुद सुनें अपने कानों से आतंक के खौफनाक टेप. आतंक के वार रूम में बैठे आकाओं के पास नरीमन हाउस, ताज और ट्राइडेंट का पूरा खाका मौजूद था और इसी बिनाह पर पाकिस्तान में बैठे आतंक के आका मुंबई में मोर्चा लिए हर आतंकवादी को ये तक बता रहे थे कि उन्हें कब छुपना है और कब सामने आना है, कब ग्रेनेड फेंकने हैं, कब गोलियां चलानी हैं और कब आग लगानी है.

मुँबई में मोर्चा आतंकवादियों को लेना था। लेकिन उनकी पोजीशन क्या होगी ये सरहद पर पाक में बैठे मास्टरमाइंड तय कर रहे थे. वो बता रहे थे कि कैसे एक को सीढ़ियां कवर करनी है और दूसरे को क्रॉस फायरिंग के लिए पोजीशन बदलनी है. वो बता रहे थे कि किस तरह दीवार से चिपक कर खड़े होने पर ग्रेनेड फटने की सूरत में जान को खतरा हो सकता है. जाहिर है एक-एक कोने की खूबियों और कमियों से वो अच्छी तरह वाकिफ थे. ऐसी कमांड सिर्फ वही लोग दे सकते हैं जो या तो खुद आर्मी की ट्रेनिंग ले चुके हों और ऐसी सैनिक कार्रवाइयों का जिन्हें अच्छा-खासा अनुभव हो। सवाल उठता है कि आतंकवादियों के मास्टरमाइंड कहीं वो लोग तो नहीं जिनका पाक सेना से कभी कोई रिश्ता रहा हो.

दुनिया में आतंकवादी हमले का ये पहला ऐसा मामला होगा जिसमें आतंकवादियों को एक दूसरे मुल्क में बैठे उनके आका लाइव कमांड दे रहे थे। कमांड पाकिस्तान से मिल रहा था और ऑपरेशन मुंबई में चल रहा था. मुंबई हमले के दौरान आतंकवादियों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी ताज को बर्बाद करने में थी. पाकिस्तान में बैठे आतंक के आका बार-बार एक ही बात पर जोर दे रहे थे कि पूरे ताज को आग के हवाले कर दो. ताज में छुपे आतंकवादियों को शायद उर्दू ठीक से नहीं आती थी, इसीलिए वो लगातार पंजाबी में बात कर रहे थे.

ताज का मंजर हंगामाखेज था। ताज में चार आतंकी दाखिल हुए। एक घंटे तक कत्लेआम मचाने के बाद आतंकियों ने ताज के कमरा नंबर 632 में अपना ठिकाना बना लिया. दो आतंकवादी इस कमरे में ही रहे जबकि दो किसी और माकूल ठिकाने की तलाश में ताज के गलियारों में निकल पड़े. लेकिन रिमोट कंट्रोल पाक में बैठे आकाओं के हाथ में था जो फोन पर ही रणनीति बना रहे थे. पेश है ताज में घुसे आतंकियों और उनके आकाओं की बातचीत के अंश:

आका: आप अपना ख्याल रखाना, सीढ़ियां कवर हैं या नहीं? नीचे से कोई ऊपर न आए।
'आतंकी: कुछ भी कवर नहीं है। हम तो बहुत ऊपर बैठे हैं, वो दोनों पता नहीं कहां चले गए हैं?
आका: मेरा भाई, सीढ़ियां जरूर कवर करो, अगर वो ऊपर आ गए तो आपका ऊपर कमरे में बैठने का कोई फायदा नहीं। हॉलनुमा कमरा देखना था.
आतंकी: मैंने बहुत कहा, वो आ ही नहीं रहे हैं। मैं उन्हें बार-बार कह रहा हूं.
आका: उन्होंने दूसरी तरफ पोजिशन ले ली होगी। वो गए कहां हैं? कितनी दूर गए हैं?
आतंकी: उन्हें तो नजदीक ही भेजा था, अब दूर चले गए होंगे।आका: नीचे तो नहीं गए क्या?
आतंकी: नहीं उन्हें मालूम है कि नीचे काम शुरू हो गया है। अब पता नहीं.
आका: ग्रेनेड है आपके पास? ग्रेनेड बेशक नीचे फेंको। ग्रेनेड अच्छा भला वफा करता है. एक ग्रेनेड फेंकते हो तो वो 15-20 मिनट सोचते हैं कि आगे बढ़ें कि नहीं.
आतंकी: अच्छा एक ग्रेनेड फेंकता हूं।

रणनीति का अहम हिस्सा था आतंकियों को मोर्चा लेने के पैंतरे बताना और आका ये काम कुछ इस अंदाज में कर रहे थे.
आका: ऊपर कमरों को आग लगा दो, जो कमरे खाली करोगो, आग लगा देना मेरे भाई। आपने पता है क्या काम करना है. उन्हें नीचे लेकर आना है, पुलिस है नीचे, नीचे पूरा पहरा दो, मैंने कहा था कि हर 15 -20 मिनट बाद ग्रेनेड फेंक दिया करो, वो फेंक रहे हो ना?
आतंकी: ठीक है अब ऊपर से आते समय सरप्रराइज देकर आएंगे, दरवाजा एंट्री बड़ी जबरदस्त है, शीशे बहुत बड़े-बड़े हैं।
आका: शीशे तोड़ दो।आतंकी: नहीं-नहीं कमरा स्ट्रॉंग होल्ड के लिए है.
आका: हां, स्ट्रॉंग होल्ड के लिए ढूंढ लिया क्या?आतंकी: बड़ा बेहतरीन कमरा है। वैसे महफूज है, डबल-डबल किचन है, बाथ है, एक छोटा सा बाज़ार लगता है.
आका: यहां पानी है क्या?
आतंकी: हां।पाक: पानी की बाल्टी अपने पास रखनी है. तौलिया और पानी की बाल्टी अपने पास रखनी है. आंसू गैस के जो गोले पुलिस वाले मारेंगे तो पानी और तौलिये ने आपका बचाव करना है.

पाकिस्तान में बैठे आका बार-बार समझा रहे थे कि ग्रेनेड को कैसे और कब इस्तेमाल करना है और इधर आतंकी भी मिनट-दर-मिनट का हाल आकाओं को बता रहे थे।

आका: पोजिशन बदलो, पोजिशन बदलो, इकट्ठे मत बैठो पोजिशन बदलो। जहां से वो आ रहे हैं वहां ग्रेनेड फेंको.
आतंकी: सोहैब ने फायर किया तो वो पीछे भाग गए हैं।
आका: अच्छा मेरे भाई। चारों इकट्ठे न बैठो, फैल जाओ ताकि कोई भी ऊपर आएगा तो एक पोजिशन को कवर करेगा तो तीन जगह से फायर खाएगा भी ना.
आतंकी: फिर हम साथ वाले कमरे में चले जाएं क्या ?
आका: अच्छा, साथ वाला है? सामने कोई नहीं है क्या?
आतंकी: नहीं-नहीं। फिर तो हम ही आमने-सामने हो जाएंगे.

पूरी बातचीत से साफ है कि ताज के अंदर आतंकी थे और सीमापार उनके हुक्मरान। यानी मुंबई के हमलावरों की डोर पाकिस्तान के कंट्रोल रूम में थी. फोन पर ही वो मुंबई में सब कुछ करा रहे थे जो वो चाहते थे.

आपस में वो जिस तरह बातचीत कर रहे थे उससे साफ जाहिर है कि एक खास टीम आतंकवादियों को कमांड देने के काम में लगी थी। ठीक वैसे ही जैसे जंग के वक्त सेना के आला अफसर बैठकर रणनीति बनाते हैं और फौज के दस्तों को आगे की रणनीति बताते हैं। यही हो रहा था मुंबई हमलों के दौरान. पर सवाल ये कि आतंकवादियों के वार रूम की कमान किसके हाथों में थी? आतंक के वार रूम में कितने लोग थे? और वो कौन थे? इन तमाम सवालों के जवाब पाकिस्तान ने अब तक नहीं दिए हैं.

तारीख 27 नवंबर, वक्त रात एक बज कर चार मिनट, जगह होटल ताज

ऑपरेशन बेशक मुंबई में चल रहा था लेकिन उसका रिमोट कंट्रोल था पाकिस्तान में. मुंबई में छुपे आतंकवादी पाकिस्तान में बैठे अपने कमांडरों को एक-एक पल की खबर दे रहे थे और उसी के आदार पर पाक कमांडर बना रहे थे आगे की रणनीति।

पाक: आपको बताया था कि कमरे में कैमरे लगे हैं, आप लाइट बंद कर दो, सारे बटन बंद कर दो, जहां भी कैमरा दिखाई पड़े फायर मार दो। इन सब चीज़ों का ख़्याल रखो मेरा वीर. ये सब चीजें आपको एक्सपोज़ करने वाली हैं, कि आप कितने आदमी हो, कहां हो, किस हालत में हो, आपकी सारी सिक्यूरिटी बाहर आती है.
ताज: हमें पता नहीं चल रहा है कि कैमरे कहां हैं? कहां नहीं हैं?
पाक: क्यों नहीं नज़र आता है? ऊपर क्या लगा है? लाइट लगी है ना? लाइट के अलावा क्या है?
ताज: मसलन लाइटें लगी हैं। पता नहीं किस-किस चीज़ का बटन है?

दरअसल मुंबई पुलिस और कमांडो आतंकवादियों का लोकेशन पता करने के लिए होटल के सीसीटीवी का इस्तेमाल कर रहे थे. वहां से पुलिस कंट्रोल रूम को खबर मिली कि आतंकवादी होटल की छठी मंजिल के कमरा नंबर 632 में हैं. लेकिन पाकिस्तान के आतंकी वार रूम तक खबर पहुंची कि वो कमरा नंबर 360 या 361 में हैं. आकाओं को लगा कि उनके मोहरे फंस रहे हैं, बस इसीलिए उन्होंने फौरन सीसीटी कैमरों को नष्ट करने का हुक्म दिया और साथ ही होटल को आग के हवाले करने का फरमान दे दिया.

ताज: हर साइड पर बड़े-बड़े कम्प्यूटर पड़े हैं। 22-22 30-30 इंच के कम्प्यूटर पड़े हैं.
पाक: उनको जलाया नहीं?
ताज: बस हम अभी आग लगाने लगे हैं। इंशाअल्लाह देखना अब थोड़ी देर बाद ही आपको आग नज़र आएगी.
पाक: आग हमें यहां तक नजर आए तभी तो है। शोले उठते नज़र आएं.
ताज: अभी थोड़ी देर में ही आपको नज़र आएगी आग लगी हुई।
ताज: बात सुनो, दो भाई गए हैं समंदर वाली साइड की तरफ कमरा खोलने के लिए। जब खोल लेंगे तो फिर हम इस कमरे को आग लगा के उधर आ जाते हैं.
पाक: अच्छा आग लगादो मेरे वीर, लेट न करो।
ताज: कमरा एक ही है हमारे पास. अगर आग लगा दी तो हम कहां जाएंगे
पाक: अच्छा आप सबसे ऊपरी मंजिल पर हो? गली में जो कालीन पड़े हैं पर्दे भी, उनको आग लगा दो दूसरी तरफ जाकर।
ताज: वही बताया न। दूसरे भाई आते हैं तो आग लगाते हैं.
पाक: बहुत लेट हो जाओगे। ग्रेनेड भी नहीं फेंका है. कितनी देर लगती है ग्रेनेड फेंकने में? नीचे बहुत गाड़ियां खड़ी हैं.
ताज: दोनों को बार-बार भेज रहा हूं। वो फेंकते ही नहीं, ऐसे ही वापस आ जाते हैं. पता नहीं क्या कर रहे हैं? वो कहते हैं कि फेंकते हैं पर फेंकते नहीं.
पाक: ग्रेनेड फेंकना कौन सा बड़ा काम है? पिन खींचों और नीचे फेंक दो।
ताज: जो हमने डिब्बा फेंका है ना उससे सारे होटल में धूंआ ही धूंआ हो गया है।
पाक: तो फिर क्या हुआ? उससे परेशान नहीं होना है। जो कुछ होना था, वो हो गया. थोड़ी देर में वो खत्म हो जाएगा. आप अपना काम जारी रखो.
ताज: ठीक है।
पाक: फोन जब भी करेंगे, तब अटेंड करना है। आग वाले काम में देर नहीं करनी.
ताज: आग अभी लग जाएगी इंशाहअल्लाह।

पाकिस्तान के वार रूम से कमांड देने वाले लोग कौन थे? वार रूम से जब भी मुंबई में आतंकवादियों के पास फोन आता तो उधर से ज्यादातर तीन ही लोग बात किया करते थे। जुंदल, वसी और काफा. मुंबई में मोर्चा लिए आतंकवादी हर बार बातचीत के दौरान भी सिर्फ इन्हीं के नाम ले रहे थे. हां, बीच में दो-चार बार एक बुजुर्ग का भी जिक्र आता है और जिस तरह से इस बुजुर्ग का जिक्र आता है या जिस तरीके से वो ज्यादातर खामोश रहता है उससे ऐसा लगता है कि वार रूम में बैठे आतंक के आकाओं में उसका कद सबसे बड़ा था. पर ये चारों कौन थे और क्या ये उनके असली नाम थे या कोड नेम. फिलहाल इसका जवाब पाकिस्तान ने नहीं दिया है. वैसे इस पूरी बातचीत की एक और अहम बात ये है कि फोन हर बार वार रूम से ही किया जाता था. मुंबई आए आतंकवादियों ने अपनी तरफ से एक भी कॉल उन्हें नहीं किया था. शायद ये भी उनकी साजिश का एक हिस्सा था.

आज तक.com से साभार
नीरज कुमार दुबे

2 comments:

संगीता पुरी said...

अच्‍छी और विस्‍तृत जानकारी दी...धन्‍यवाद।

रवीन्द्र प्रभात said...

अच्छी जानकारी दी है आपने, बधाईयाँ !