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Tuesday 27 January 2009

आइये... जो शहीद हुये हैं उनकी जरा याद करें कुर्बानी



आइये जानें उन अमर शहीदों की वीरगाथाओं के बारे में जिन्हें इस वर्ष अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। आइये सैल्यूट करें उन अमर शहीदों को जिन्होंने देश की खुशहाली और अमन के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिये।

26 जनवरी 2009 को जब गणतंत्र दिवस की परेड देखने गया तो भारत भर की सांस्कृतिक छटा तो राजपथ पर देखने को मिली ही साथ ही देश के उन महान शहीदों को याद करने का भी मौका मिला जिन्होंने मुस्कुराते हुये अपने प्राण देश पर न्योछावर कर दिये। इस वर्ष जिन शहीदों को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनका नाम लिये जाने पर आंखें भर आईं और उनके अमर बलिदान को याद कर यही शपथ ली कि भारत मां तेरे लाल तुम पर कभी आंच नहीं आने देंगे। यहां एक मशहूर कविता की कुछ लाइनें व्यक्त कर अपने हृदय में उभर रही भावनाओं को व्यक्त कर रहा हूं।

मन समर्पित, तन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

मां तुम्हारा ऋण बहुत है मैं अकिंचन
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन
थाल में लाऊं सजा कर भाल जब भी
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण

गान अर्पित प्राण अर्पित
रक्त का कण कण समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

मांज दो तलवार, लाओ न देरी
बांध दो कस कर कमर पर ढाल मेरी
भाल पर मल दो चरण की धूल थोड़ी
शीश पर आशीष की छाया घनेरी

स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित
आयु का क्षण क्षण समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

तोड़ता हूं मोह का बन्धन, क्षमा दो
गांव मेरे, द्वार, घर, आंगन क्षमा दो
आज सीधे हाथ में तलवार दे दो
और बायें हाथ में ध्वज को थमा दो

यह सुमन लो, यह चमन लो
नीड़ का त्रण त्रण समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं

इस वर्ष जिन लोगों को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। आइये जानते हैं उनकी वीर गाथाओं के बारे में-

श्री आर. पी. डेंगदोह, मेघालय पुलिस सेवा

6 नवंबर, 2007 को यह सूचना मिली कि स्वचालित राइफलों तथा बड़ी मात्रा में विस्फोटकों से लैस लगभग दस उग्रवादियों ने मेघालय के जंगलों में एक शिविर डाल रखा है। श्री आर. पी. डेंगदोह उग्रवादियों के विरुध्द कार्रवाई में पुलिस दल को नेतृत्व प्रदान करने के लिए स्वेच्छा से आगे आये। पुलिस दल अगले दिन सूर्योदय से ठीक पहले मौके पर पहुंचा तथा उग्रवादियों को शिविर से बाहर खदेड़ने के लिए शिविर पर टूट पड़ा। उग्रवादियों ने आक्रमण दल पर भारी गोलीबारी कर दी। श्री डेंगदोह ने बहादुरी से गोलीबारी का जवाब दिया तथा एक उग्रवादी को मार गिराया। तथापि, उनको भी एक गोली लग गई। गंभीर घाव की परवाह न करते हुये उन्होंने दल का नेतृत्व जारी रखा तथा दो दुर्दांत उग्रवादियों को बंदी बनाने में कामयाब हो गये।

श्री आर। पी. डेंगदोह ने उग्रवादियों के विरुध्द लड़ाई में अनुकरणीय कर्तव्यपरायणता तथा उत्कृष्ट बहादुरी का प्रदर्शन किया तथा सर्वोच्च बलिदान दिया।

सहायक कमाण्डेंट श्री प्रमोद कुमार सत्पथी
विशेष आपरेशन ग्रुप, उड़ीसा राज्य सशस्त्र पुलिस के प्रशिक्षण प्रभारी

15 फरवरी, 2008 की रात भारी मात्रा में हथियारों से लैस 500 से भी अधिक नक्सलवादियों ने भुवनेश्वर के इर्द-गिर्द अनेक स्थानों पर एक साथ पुलिस पर आक्रमण कर दिया तथा बहुत से हथियार लूट लिये और कई पुलिस कर्मियों को मार दिया। तत्पश्चात् वे पास के जंगलों में छिप गये।

विशेष आपरेशन ग्रुप के सहायक कमाण्डेंट, प्रमोद कुमार सतपथी मात्र 20 पुलिस कर्मियों के साथ जंगल के अंदर ऊंचे स्थान पर मोर्चा लिये नक्सलियों के पास पहुंचे और उन पर तुरंत धावा बोल दिया। नक्सलियों ने पुलिस दल पर भारी गोलीबारी की और लगभग दो घंटे तक चलने वाली भीषण मुठभेड़ में श्री सतपथी ने अनुकरणीय बहादुरी के साथ ऑपरेशन का नेतृत्व किया तथा सर्वोच्च बलिदान दिया।
श्री प्रमोद कुमार सतपथी ने नक्सलियों के विरुध्द लड़ते हुये उच्च कोटि की वीरता तथा कर्तव्यपरायणता का प्रदर्शन किया।

आई सी- 45618 कर्नल जोजन थॉमस
जाट रेजिमेंट/45 राष्ट्रीय राइफल

जम्मू-कश्मीर में तैनात 45 राष्ट्रीय राइफल बटालियन के कमान अफसर कर्नल जोजन थॉमस को 22 अगस्त, 2008 को प्रात: 03.30 बजे एक आतंकवादी समूह का पता चला। कर्नल थॉमस उपलब्ध सैनिकों के साथ तुरंत उस क्षेत्र की ओर गये और शीघ्र ही भयंकर गोलीबारी शुरू हो गयी। मोर्चे पर अगुवाई करते हुये कर्नल थॉमस शीघ्र आगे बढ़े तथा बिल्कुल नजदीक से दो आतंकवादियों का सफाया कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान उन्हें गोलियों के गंभीर घाव लगे। इसके बावजूद उन्होंने गुत्थम-गुत्था की भयंकर लड़ाई में तीसरे दुर्दांत आतंकवादी का सफाया कर दिया।

कर्नल जोजन थॉमस ने तीन कट्टर आतंकवादियों का सफाया करने में अनुकरणीय नेतृत्व तथा असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन किया तथा राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

श्री मोहन चन्द शर्मा, निरीक्षक, दिल्ली पुलिस

श्री मोहन चन्द शर्मा, इन्सपेक्टर, दिल्ली पुलिस को 19 सितम्बर 2008 को एक खास सूचना मिली कि दिल्ली श्रृंखलाबध्द बम धमाकों के संबंध में वांछित एक संदिग्ध व्यक्ति जामिया नगर, दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र में स्थित बाटला हाउस के एक फ्लैट में छिपा हुआ है।

श्री शर्मा सात सदस्यीय दल का नेतृत्व करते हुये तुरंत उस फ्लैट पर पहुंचे। ज्यों ही उन्होंने फ्लैट में अन्य दरवाजे से प्रवेश किया, उनको फ्लैट के अंदर छुपे हुये आतंकवादियों की ओर से गोलीबारी का पहली बौछार लगी। निर्भीकता के साथ उन्होंने गोलीबारी का जवाब दिया। इस प्रकार शुरू हुई दोनों तरफ की गोलीबारी में दो आतंकवादी मारे गये तथा एक पकड़ा गया।

श्री मोहन चन्द शर्मा ने आतंकवादियों से लड़ते हुये अनुकरणीय साहस कर्तव्यपरायणता का प्रदर्शन किया तथा राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

13621503 हवलदार बहादुर सिंह बोहरा
10वीं बटालियन पैराशूअ रेजिमेंट (विशेष बल)

हवलदार बहादुर सिंह बोहरा जम्मू-कश्मीर के लवांज के सामान्य क्षेत्र में तलाशी आपरेशन हेतु तैनात आक्रमण दल के स्क्वाड कमांडर थे। उन्होंने 25 सितम्बर, 2008 को शाम 6.15 बजे आतंकवादी दल को देखा तथा उन्हें बीच में ही रोकने के लिए शीघ्रता से आगे बढ़े। इस प्रक्रिया के दौरान, हवलदार बहादुर सिंह बोहरा शत्रु की भारी गोलीबारी की चपेट में आ गये। निर्भीकता के साथ वह आतंकवादियों पर टूट पड़े तथा उनमें से एक को मार गिराया। तथापि, उन्हें गोलियों के गहरे घाव लगे। सुरक्षित स्थान पर ले जाये जाने से इंकार करते हुये उन्होंने आक्रमण जारी रखा तथा बिल्कुल नजदीक से दो और आतंकवादियों को मार गिराया।

इस प्रकार, हवलदार बहादुर सिंह बोहरा ने आतंकवादियों के विरुध्द लड़ाई में अत्यधिक असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया तथा राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

श्री हेमन्त कमलाकर करकरे
संयुक्त पुलिस आयुक्त, महाराष्ट्र

26 नवम्बर, 2008 को रात्रि 9.40 बजे श्री हेमन्त कमलाकर करकरे, संयुक्त पुलिस आयुक्त तथा आतंकवादी रोधी दस्ते के प्रमुख को छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन, मुंबई पर आतंकवादियों के आक्रमण के बारे में सूचना मिली।

त्वरित कार्रवाई करते हुये श्री करकरे ने बच निकलने के संभावित रास्तों पर दल भेजे और स्वयं एक छोटी सी टुकड़ी लेकर कामा अस्पताल की ओर चल पड़े जहां तब तक आतंकवादी पहुंच चुके थे। आतंकवादियों और पुलिस दल के बीच भारी गोलीबारी हुई। इसके परिणामस्वरूप आतंकवादी अपनी जगह बदलने के लिए मजबूर हो गये। श्री करकरे ने आतंकवादियों का पीछा किया। लेकिन इस कार्रवाई में उनकी जीप पर घात लगाकर हमला किया गया जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गये। फिर भी, वे आपरेशन का नेतृत्व करते रहे और एक आतंकवादी को बुरी तरह घायल कर पाने में सफल हो गये।
श्री हेमन्त कमलाकर करकरे ने आतंकवादियों के विरुध्द लड़ाई में उच्चकोटि के साहस और नेतृत्व का प्रदर्शन किया और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

श्री अशोक मारुतराव काम्टे
अपर पुलिस आयुक्त, महाराष्ट्र

26 नवम्बर, 2008 को भारी मात्रा में हथियारों से लैस दस आतंकवादियों ने मुंबई के विभिन्न स्थानों पर एक साथ आक्रमण कर दिया। श्री अशोक मारुतराव काम्टे, अपर पुलिस आयुक्त उस पुलिस टुकड़ी में शामिल थे जो दौड़कर कामा अस्पताल पहुंची थी जहां आतंकवादी घुस गये थे। आतंकवादी तथा पुलिस टुकड़ी के बीच गोलीबारी की लड़ाई शुरू हो गई। परिणामस्वरूप आतंकवादी अपनी स्थिति बदलने के लिए मजबूर हो गये थे। पुलिस टुकड़ी ने आतंकवादियों का पीछा किया परंतु इस कार्रवाई में उनकी जीप पर घात लगाकर हमला कर दिया गया तथा श्री काम्टे गंभीर रूप से घायल हो गये थे। तथापि, उन्होंने लड़ाई जारी रखी तथा एक आतंकवादी को घायल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्री अशोक मारुतराव काम्टे ने आतंकवादियों के विरुध्द लड़ाई में उच्चतम कोटि के साहस तथा नेतृत्व का प्रदर्शन किया तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

श्री विजय सहदेव सालस्कर, इंस्पेक्टर
अपकर्षण रोधी प्रकोष्ठ, (एंटी एक्सटोर्शन सेल) अपराध शाखा, महाराष्ट्र

26 नवम्बर, 2008 को भारी मात्रा में हथियारों से लैस दस आतंकवादियों ने मुंबई के विभिन्न स्थानों पर एक साथ धावा बोला। श्री विजय सहदेव सालस्कर, इंस्पेक्टर, अपकर्षण रोधी प्रकोष्ठ, अपराध शाखा, उस पुलिस टुकड़ी में शामिल थे जो दौड़कर कामा अस्पताल पहुंची थी जहां आतंकवादी घुस गये थे। आतंकवादी तथा पुलिस टुकड़ी के बीच गोलीबारी की लड़ाई शुरू हो गई। परिणामस्वरूप आतंकवादी अपनी स्थिति बदलने के लिए मजबूर हो गये थे। पुलिस टुकड़ी ने आतंकवादियों का पीछा किया परंतु इस कार्रवाई में उनकी जीप पर घात लगाकर हमला कर दिया गया तथा श्री सालस्कर गंभीर रूप से घायल हो गये थे। तथापि उन्होंने लड़ाई जारी रखी तथा एक आतंकवादी को घायल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्री विजय सहदेव सालस्कर ने विकट परिस्थितियों में अदम्य तथा अतुल्य साहस का प्रदर्शन किया और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

श्री तुकाराम गोपाल ओम्बले
सहायक पुलिस उपनिरीक्षक, महाराष्ट्र

26 नवम्बर, 2008 को श्री तुकाराम गोपाल ओम्बले, सहायक पुलिस उप निरीक्षक डी बी मार्ग पुलिस स्टेशन में रात्रि डयूटी पर थे जब मुंबई पर आतंकवादियों ने धावा बोला था। आधी रात के करीब वायरलेस पर यह संदेश गया कि दो आतंकवादी एक कार में मेरिन ड्राइव की ओर भाग रहे हैं। श्री ओम्बले ने इसे रोकने के लिए तुरंत बेरीकेड लगा दिये। ज्यों ही, आतंकवादियों की कार रुकी उसके अंदर बैठे एक आतंकवादी ने गोलीबारी शुरू कर दी। श्री ओम्बले हिम्मत दिखाते हुये कार की बायीं ओर दौड़े और एके-47 राइफल को छीनने के लिए एक आतंकवादी को धर दबोचा। इस कार्रवाई के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गये और बाद में घावों के कारण्ा वीर गति को प्राप्त हुये।

श्री तुकाराम गोपाल ओम्बले ने आतंकवादियों के विरुध्द लड़ाई में अदम्य साहस तथा असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन किया और सर्वोच्च बलिदान दिया।

आई सी- 58660 मेजर संदीप उन्नीकृष्णन
बिहार रेजिमेंट/51 स्पेशल एक्शन ग्रुप

मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने होटल ताज महल से आतंकवादियों को मार भगाने के लिए 27 नवम्बर, 2008 को किये गये कमांडो आपरेशन का नेतृत्व किया जिसमें उन्होंने 14 बंधकों को छुड़ाया। आपरेशन के दौरान उनकी टुकड़ी पर भारी गोलीबारी होने लगी जिसमें उनकी टुकड़ी का एक सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गया। मेजर संदीप ने निशाने पर गोलीबारी करके आतंकवादियों को घेर लिया और घायल कमांडो को सुरक्षित जगह ले जाकर बचा लिया। इस कार्रवाई के दौरान उनके दाएं हाथ में गोली लग गई थी। चोट के बावजूद आखिरी दम तक वे आतंकवादियों के खिलाफ लड़ते रहे।

मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने सखाभाव तथा ऊंचे दर्जे के नेतृत्व के साथ-साथ उत्कृष्ट वीरता का प्रदर्शन किया और राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

4073611 हवलदार गजेन्द्र सिंह
पैराशूट रेजिमेंट/51 स्पेशल एक्शन ग्रुप

27 नवम्बर, 2008 की रात हवलदार गजेन्द्र सिंह, नरीमन हाउस, मुंबई में आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाये गये लोगों को बचाने के लिए किये जा रहे आपरेशन में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। भवन की अंतिम मंजिल से आतंकवादियों का सफाया करने के बाद वे उस जगह पर जा पहुंचे जहां पर आतंकवादियों ने मोर्चा ले रखा था। ज्यों ही वे अंदर दाखिल हुये, आतंकवादियों ने ग्रेनेड से उन्हें घायल कर दिया। अडिग रहकर वह गोलियां बरसाते रहे और प्रतिपक्षी की भारी गोलियों का सामना करते हुये उन्होंने आतंकवादियों को घेर लिया। इस कार्रवाई में उन्होंने एक आतंकवादी को घायल कर दिया और अन्यों को कमरे के अंदर ही वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने मुठभेड़ जारी रखी लेकिन घावों के कारण वे वीरगति को प्राप्त हो गये।

हवलदार गजेन्द्र सिंह ने अति प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट वीरता का प्रदर्शन किया और आतंकवादियों के खिलाफ लड़ते हुये राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

नोट:- अशोक चक्र से सम्मानित शहीदों की वीरगाथा भारत सरकार की ओर से 26 जनवरी, 2009, सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह स्थल पर वितरित की गई पुस्तिका अशोक चक्र से साभार ली गई है।

जय हिन्द
नीरज कुमार दुबे

Wednesday 21 January 2009

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई: इंडिया टुडे ने सुझाये कई महत्वपूर्ण सुझाव



आतंकवाद के खिलाफ जारी वैश्विक जंग में सभी देश अपने-अपने हिसाब से निर्णय ले रहे हैं जिससे यह जंग संगठित अभियान नहीं बन पाई है। इधर देश में मुंबई में हुये आतंकवादी हमलों के बाद से आतंकवाद के खिलाफ गुस्से का जमकर इजहार किया जा रहा है। सभी लोग आतंकवाद के खिलाफ अपने-अपने सुझाव दे रहे हैं। इन महत्वपूर्ण सुझावों को एकत्रित कर उसे लेख में प्रकाशित करने का सराहनीय कार्य किया है प्रतिष्ठित पत्रिका इंडिया टुडे ने। जिसने आतंकवाद पर अपने विशेषांक में बड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किये हैं। पहले कुछ सुझाव तो सरकार के लिए हैं जिन्हें एक कार्य योजना के रूप में लिया जा सकता है। इसके अलावा कुछ सुझाव नागरिकों के लिए भी हैं जोकि खुद उनके और राष्ट्र के लिए उपयोगी सिध्द हो सकते हैं।

आतंकवाद से कड़ाई से और त्वरित गति से निपटने के लिए जो कार्ययोजना बनाई जाए उसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हों-
-घरेलू मोर्चे की सुरक्षा
-पाकिस्तान से निपटना
-पुलिस में भारी सुधार
-एनएसजी का आधुनिकीकरण
-खुफिया तंत्र का उन्नयन
-महानगरों की सुरक्षा
-भेद्य क्षेत्रों को मजबूत बनाना
-कानून को सख्त बनाना
-आतंक की फंडिंग पर अंकुश लगाना
-समूचे कश्मीर पर विजय पाना
-नागरिकों का चार्टर

आतंकवाद से निबटने का एकल केंद्र होना चाहिये, जो खुफिया जानकारी जुटाने, उसे बांटने और समन्वय के लिए जिम्मेदार हो। इसके अलावा महत्वपूर्ण स्थानों पर अच्छी तरह प्रशिक्षित और उपकरणों से लैस क्यूआरटी हो। आंतरिक सुरक्षा के मामले देखने के लिए एक पूर्णकालिक कैबिनेट मंत्री होना चाहिये तथा गृह मंत्रालय में राष्ट्रीय सुरक्षा के विशेषज्ञ अधिकारियों का एक समर्पित काडर होना चाहिये। सरकार को चाहिये कि वह अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए छह महीने के भीतर सभी भारतीय नागरिकों को राष्ट्रीय पहचान पत्र प्रदान करे। इसके अलावा विशेष कार्य बलों में सुधार कर उनमें योग्यता और विशिष्टता लाई जाये।

खाकी वर्दी वालों को अगर आतंकवाद से लोहा लेने वाला कारगर जत्था बनाना है तो उन्हें उचित प्रशिक्षण और हथियारों से लैस करना होगा। जहां तक देश की कुल आबादी के मुकाबले पुलिसवालों की संख्या के अनुपात का सवाल है तो भारत में यह सबसे कम है। यह प्रति 2000 की आबादी पर मात्र तीन का है जबकि अमेरिका में यह इससे दोगुना है।

भारत की सीमाएं अभी भी दरारों से भरी हैं। समुद्र के रास्ते उभरे नये खतरे के मद्देनजर तटों की सुरक्षा दुरुस्त करने की जरूरत है इसके लिए सीमा पर प्राथमिकता के आधार पर बाड़ लगाई जानी चाहिये। बड़े अहम प्रतिष्ठानों की शिनाख्त और सुरक्षा की जानी चाहिये। कर्मियों की संख्या घटाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिये। इसके अलावा तटीय कमान और मेरीटाइम एडवाइजर को तटीय मुद्दे देखने वाले आठ मंत्रालयों के संपर्क में रहना चाहिये।

नागरिकता विहीन तत्वों और पुराने शत्रुओं का मुकाबला करने के लिये भारतीय सेना का आधुनिकीकरण बेहद जरूरी है। इस संबंध में कार्य योजना के तहत तेजी लाएं सैन्य खरीददारियों में। खरीद का समयबध्द कार्यक्रम बनाएं और मौजूदा 6 से 8 वर्ष की अवधि को कम करें। इसके अलावा गठित करें हथियारों की खरीद को आसान बनाने के लिए अलग मंत्रालय, जिसमें स्थायी विशेषज्ञ रखे जाएं। जमीन और समुद्र में बेहतर निगरानी के लिए उपग्रह, यूएवी और लंबी दूरी के जासूसी विमान शामिल किये जाएं। तथा सटीक हमले और रात में युध्द करने की क्षमता को पुख्ता बनाया जाये।

इसके अलावा कुछ सुझाव जो नागरिकों के लिए पत्रिका ने प्रदान किये हैं। वे इस प्रकार हैं-
  • बाजार का जायजा- देखें कि आप जिन बाजारों में जाते हैं, वे सुरक्षित हैं या नहीं। अगर सुरक्षित नहीं हैं तो वहां नहीं जायें।

  • प्राथमिक उपचार सीखें- प्राथमिक उपचार का कोर्स करें ताकि आपात स्थिति में पेशेवर डॉक्टर के आने तक आप मदद कर सकें।

  • जनप्रतिनिधियों पर दबाव- अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर अधिक नागरिक सुरक्षा उपाय करवाने के लिए दबाव डालें।

  • सामुदायिक वार्डन बनें- संदेहास्पद गतिविधियों की सूचना देकर अपने पास-पड़ोस की निगरानी में मदद करने के लिए स्वयंसेवक बनें।

  • खुल कर दान दें- आतंकवाद के शिकार लोगों की सच्ची मदद करने वालों की तलाश करें और उदारतापूर्वक दान दें।

  • पुलिस पर नजर- पुलिस थाने में जाकर देखें कि वहां खतरे से निबटने के लिए समुचित सुविधाएं, पुलिस बल और हथियार हैं या नहीं।

  • मुस्तैद रहें- आतंकवादियों से निबटने का प्रशिक्षण लें, इसके लिए नागरिक प्रशासन से प्रशिक्षण केंद्र का पता मालूम करें।

  • पहचान का प्रमाण- राष्ट्रीय आईडी कार्ड व्यवस्था के तहत हर नागरिक को पंजीकृत कराने का अभियान बनाएं।

  • अपराधियों को खारिज करें- आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को चुनाव में वोट न देने का संकल्प लें।

  • जुर्माना भरें- दंडित किये जाने पर अधिकारियों को रिश्वत देने के बदले अपना जुर्माना भरें।

  • सुरक्षा पर निगरानी- आपके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ते हैं उनके प्रबंधकों और आप जहां काम करते हैं, उस कार्यालय से कहें कि इमारत की बनावट के खाके की प्रतियां बनाएं।

  • अपने पड़ोस पर नजर रखें- अपने पास-पड़ोस पर नजर रखें। संदिग्ध हरकतों और व्यक्तियों की सूचना पुलिस को दें।

  • अच्छी तरह लैस रहें- आपातकालीन स्थिति में जरूरी उपायों के लिए अपनी निवासी कल्याण समिति से विवरण हासिल करें।

  • संपर्क नंबर रखें- अपने क्षेत्र के आपातकालीन सेवा केंद्रों की सूची रखें, जिसमें उनका पता और फोन नंबर हो।

  • भरोसे के लोग रखें- अपने यहां भरोसे के लोगों को ही काम पर रखें और किरायेदार की पुलिस जांच अवश्य कराएं।

  • मिलन स्थल बनाएं- अपने पड़ोस में ऐसे स्थान तय करें जहां आपात के समय लोग एकत्र हो सकें।

  • नक्शा रखें- अपने कार्य के स्थल और बच्चे के स्कूल तक आने-जाने के लिए वैकिल्पक मार्ग खोज कर रखें।

  • आगे आएं- अगर आप आतंकवादी हमले के साक्षी हैं तो गवाही के लिए आगे आयें।

  • धैर्य रखें- सार्वजनिक स्थानों और वाहनों में सामान की जांच के कारण देरी होने पर धैर्य रखें।

  • आपात योजना- परिवार के लिए आपात योजना बनाएं और मित्रों के साथ इसका अभ्यास करें।

यदि उपरोक्त सुझावों पर सरकार और सभी नागरिक गौर करें और इन्हें अमल में लाया जाये तो निश्चित रूप से आतंकवाद के खिलाफ मुहिम के निर्णायक परिणाम प्राप्त होंगे। आइये, एक बार फिर शपथ लें कि आतंकवाद को मिटाना है और भारत में शांति, अमन, सुख और समृध्दि लानी है।


जय हिन्द
नीरज कुमार दुबे

Friday 16 January 2009

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात


मुंबई में हुये आतंकवादी हमलों के बाद भारत के कड़े रुख को देखकर लगा था कि आतंकवाद के खिलाफ इस बार वाकई निर्णायक कार्रवाई की जायेगी। लगभग डेढ़ महीने तक भारत-पाक के बीच वाक्युध्द हुआ भी लेकिन अब ऐसा लगता है कि सरकार कड़े रुख की मुद्रा छोड़ आराम की मुद्रा में आ गई है। सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने दो दिनों में ऐसे संकेत दिये हैं जिससे प्रतीत होता है कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई अब कमजोर पड़ती जा रही है।

पहला संकेत दिया विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने जिन्होंने पाकिस्तान से मुंबई हमले के दोषियों और अन्य आतंकवादियों को सौंपने की मांग पर कुछ नरमी लाते हुए कहा कि यदि उस देश में ऐसे लोगों पर मुकदमा चलाया जाता है तो भारत को कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह छद्म मुकदमा नहीं होना चाहिए और इसे पारदर्शी ढंग से चलाया जाना चाहिए। विदेश मंत्री पाकिस्तान से यह उम्मीद कैसे कर रहे हैं कि वह इस बारे में सही जानकारी देगा? विदेश मंत्री के इस बयान से भारत के रुख में नरमी का संकेत मिलता है क्योंकि अभी तक कहा जा रहा था कि भगोड़ों को सौंपा जाए ताकि भारत में उन पर मुकदमा चलाया जा सके। यही नहीं भारत ने इस मांग को लेकर वैश्विक स्तर पर अभियान भी चलाया था अब अचानक ही इस मांग से पीछे हटने से क्या सही संदेश जायेगा?

दूसरा संकेत दिया गृहमंत्री पी। चिदम्बरम ने, जिन्होंने अपना पद संभालते के साथ ही जिस तेजी के साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कानून संसद से पारित कराकर यह संदेश देने का प्रयास किया था कि आतंकवाद की अब खैर नहीं। उन्होंने उक्त कार्यों को हुये महीना भर भी नहीं गुजरा कि कह दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानून के प्रावधानों पर पुनर्विचार के लिए वह तैयार हैं। सभी मुख्यमंत्रियों एवं उप राज्यपालों को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि यदि इन कानूनों में कोई परिवर्तन करने की जरूरत महसूस हुई तो हम कभी भी प्रावधानों पर पुनर्विचार कर सकते हैं और संसद के अगले सत्र में बदलाव रख सकते हैं। उन्होंने यह बयान देकर सही नहीं किया क्योंकि इससे देश के सॉफ्ट स्टेट होने की धारणा एक बार फिर बलवती हुई है। जब हम संसद से सर्वसम्मति से पारित किये गये कानून पर ही दृढ़ नहीं रह पायेंगे तो आतंकवाद के खिलाफ हमारी दृढ़ता कैसे कायम रह पायेगी।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सरकार की इच्छाशक्ति में कमी क्यों आई, यह विश्लेषण का विषय है। इस समय हमें पाकिस्तान पर और अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की जरूरत है लिहाजा आंतरिक मतभेदों को दरकिनार कर जनमानस के अनुरूप आतंकवाद और उसके पोषकों के खिलाफ सख्त रूख बनाये रखना चाहिये। इसी से यह लड़ाई अपनी परिणति को प्राप्त होगी।

नीरज कुमार दुबे

Friday 9 January 2009

मुंबई हमलों से दुनिया भर को सतर्क होने की जरूरत


अमेरिकी कांग्रेस में हुई चर्चा का यह निष्कर्ष वाकई चिंता का विषय है कि मुंबई में तबाही का मंजर पैदा कर देने वाले तुलनात्मक रूप से कम आधुनिक तकनीक के हथियारों के साथ आए हमलावर दूसरे आतंकवादियों के लिए आदर्श बन सकते हैं और भविष्य में हमलों के लिए उनकी नकल कर सकते हैं। मुंबई के हमलों से मिले सबक को लेकर कांग्रेस कमेटी के साथ चर्चा में एफबीआई और न्यूयार्क पुलिस विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि भारत की वित्ताीय राजधानी पर हुए हमले इस प्रकार के हमलों में आतंकवादियों द्वारा अपनाई गई रणनीति एक बड़ा मोड़ है। उन्होंने कहा- यह बेहद जरूरी है कि इन हमलों की साजिश रचने वालों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाए क्योंकि ऐसा नहीं करने पर इस प्रकार के और हमले हो सकते हैं।

वाकई यह समय कार्रवाई करने का है, कार्रवाई भी ऐसी होनी चाहिए जिससे आतंकवाद को कड़ा संदेश जाये। लेकिन हम अभी तक सिर्फ राजनय के माध्यम से ही पाकिस्तान पर दबाव बनाने में जुटे हुये हैं। यह कैसा राजनय है कि जिससे हमें भी खुश करने के प्रयास जारी हैं और उस राजनय से पाकिस्तान भी खुश ही है। भले ही उस पर अमेरिका सहित अन्य देशों का भारी दबाव पड़ रहा है लेकिन वह कर तो अपने मन की ही रहा है। हमला करने या गलती करने के बाद जो भय उसके चेहरे पर दिखाई देना चाहिए वह नहीं दिखाई दे रहा है।

यह भी वाकई शर्मनाक है कि सिर्फ परंपरागत हथियारों के बल पर 10 आतंकवादियों ने तबाही का एक खौफनाक मंजर पैदा कर दिया जिसमें 500 लोग हताहत हुए। इसलिए अमेरिकी कांग्रेस का यह निष्कर्ष सही प्रतीत होता है कि हमलावरों का तुलनात्मक रूप से कम आधुनिक हथियारों के साथ आना एक मोड़ साबित हो सकता है। एफबीआई के प्रमुख खुफिया अधिकारी डोनाल्ड एन वान डयून ने कहा भी है कि यह हमला स्पष्ट तौर पर सफल था और दूसरे संगठन दुनिया के दूसरे हिस्सों में इस माडल की नकल करने की कोशिश करेंगे। मुंबई हमलों का सबसे बड़ा सबक इस बात को पुष्ट करता है कि कम संख्या वाले प्रशिक्षित और प्रतिबध्द हमलावर कम आधुनिक हथियारों से काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। दरअसल कमी हमारे में यह है कि हम ऐसी रणनीति पर अपना ध्यान केंद्रित करते है जो आकर्षक और गोपनीय हो। लेकिन ज्यादातर आतंकवादियों के मामले में, वे ऐसी चीज पर ध्यान देते हैं जो कारगर हों।

यह भी देखने में आया है कि आतंकवादियों का मीडिया के प्रति बेहद रुझान है और उन्होंने इसके जरिये काफी सफलता भी पाई है। मीडिया के जरिए आतंकवादियों ने दुनिया को 72 घंटों तक हिलाए रखा। निश्चित तौर पर मुंबई के हमलों ने यह दिखा दिया है कि इस तरह के हमले दुनियाभर में किए जा सकते हैं। ऐसे संभावित हमलों से सतर्क होने की बेहद आवश्यकता है। इस संबंध में गृह मंत्री पी। चिदंबरम का यह बयान कि घटना से पहले हमें सजग होना होगा, काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी को आधार बनाकर ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को सही मुकाम तक पहुंचाया जा सकता है।

नीरज कुमार दुबे