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Wednesday 21 January 2009

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई: इंडिया टुडे ने सुझाये कई महत्वपूर्ण सुझाव



आतंकवाद के खिलाफ जारी वैश्विक जंग में सभी देश अपने-अपने हिसाब से निर्णय ले रहे हैं जिससे यह जंग संगठित अभियान नहीं बन पाई है। इधर देश में मुंबई में हुये आतंकवादी हमलों के बाद से आतंकवाद के खिलाफ गुस्से का जमकर इजहार किया जा रहा है। सभी लोग आतंकवाद के खिलाफ अपने-अपने सुझाव दे रहे हैं। इन महत्वपूर्ण सुझावों को एकत्रित कर उसे लेख में प्रकाशित करने का सराहनीय कार्य किया है प्रतिष्ठित पत्रिका इंडिया टुडे ने। जिसने आतंकवाद पर अपने विशेषांक में बड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किये हैं। पहले कुछ सुझाव तो सरकार के लिए हैं जिन्हें एक कार्य योजना के रूप में लिया जा सकता है। इसके अलावा कुछ सुझाव नागरिकों के लिए भी हैं जोकि खुद उनके और राष्ट्र के लिए उपयोगी सिध्द हो सकते हैं।

आतंकवाद से कड़ाई से और त्वरित गति से निपटने के लिए जो कार्ययोजना बनाई जाए उसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हों-
-घरेलू मोर्चे की सुरक्षा
-पाकिस्तान से निपटना
-पुलिस में भारी सुधार
-एनएसजी का आधुनिकीकरण
-खुफिया तंत्र का उन्नयन
-महानगरों की सुरक्षा
-भेद्य क्षेत्रों को मजबूत बनाना
-कानून को सख्त बनाना
-आतंक की फंडिंग पर अंकुश लगाना
-समूचे कश्मीर पर विजय पाना
-नागरिकों का चार्टर

आतंकवाद से निबटने का एकल केंद्र होना चाहिये, जो खुफिया जानकारी जुटाने, उसे बांटने और समन्वय के लिए जिम्मेदार हो। इसके अलावा महत्वपूर्ण स्थानों पर अच्छी तरह प्रशिक्षित और उपकरणों से लैस क्यूआरटी हो। आंतरिक सुरक्षा के मामले देखने के लिए एक पूर्णकालिक कैबिनेट मंत्री होना चाहिये तथा गृह मंत्रालय में राष्ट्रीय सुरक्षा के विशेषज्ञ अधिकारियों का एक समर्पित काडर होना चाहिये। सरकार को चाहिये कि वह अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए छह महीने के भीतर सभी भारतीय नागरिकों को राष्ट्रीय पहचान पत्र प्रदान करे। इसके अलावा विशेष कार्य बलों में सुधार कर उनमें योग्यता और विशिष्टता लाई जाये।

खाकी वर्दी वालों को अगर आतंकवाद से लोहा लेने वाला कारगर जत्था बनाना है तो उन्हें उचित प्रशिक्षण और हथियारों से लैस करना होगा। जहां तक देश की कुल आबादी के मुकाबले पुलिसवालों की संख्या के अनुपात का सवाल है तो भारत में यह सबसे कम है। यह प्रति 2000 की आबादी पर मात्र तीन का है जबकि अमेरिका में यह इससे दोगुना है।

भारत की सीमाएं अभी भी दरारों से भरी हैं। समुद्र के रास्ते उभरे नये खतरे के मद्देनजर तटों की सुरक्षा दुरुस्त करने की जरूरत है इसके लिए सीमा पर प्राथमिकता के आधार पर बाड़ लगाई जानी चाहिये। बड़े अहम प्रतिष्ठानों की शिनाख्त और सुरक्षा की जानी चाहिये। कर्मियों की संख्या घटाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिये। इसके अलावा तटीय कमान और मेरीटाइम एडवाइजर को तटीय मुद्दे देखने वाले आठ मंत्रालयों के संपर्क में रहना चाहिये।

नागरिकता विहीन तत्वों और पुराने शत्रुओं का मुकाबला करने के लिये भारतीय सेना का आधुनिकीकरण बेहद जरूरी है। इस संबंध में कार्य योजना के तहत तेजी लाएं सैन्य खरीददारियों में। खरीद का समयबध्द कार्यक्रम बनाएं और मौजूदा 6 से 8 वर्ष की अवधि को कम करें। इसके अलावा गठित करें हथियारों की खरीद को आसान बनाने के लिए अलग मंत्रालय, जिसमें स्थायी विशेषज्ञ रखे जाएं। जमीन और समुद्र में बेहतर निगरानी के लिए उपग्रह, यूएवी और लंबी दूरी के जासूसी विमान शामिल किये जाएं। तथा सटीक हमले और रात में युध्द करने की क्षमता को पुख्ता बनाया जाये।

इसके अलावा कुछ सुझाव जो नागरिकों के लिए पत्रिका ने प्रदान किये हैं। वे इस प्रकार हैं-
  • बाजार का जायजा- देखें कि आप जिन बाजारों में जाते हैं, वे सुरक्षित हैं या नहीं। अगर सुरक्षित नहीं हैं तो वहां नहीं जायें।

  • प्राथमिक उपचार सीखें- प्राथमिक उपचार का कोर्स करें ताकि आपात स्थिति में पेशेवर डॉक्टर के आने तक आप मदद कर सकें।

  • जनप्रतिनिधियों पर दबाव- अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर अधिक नागरिक सुरक्षा उपाय करवाने के लिए दबाव डालें।

  • सामुदायिक वार्डन बनें- संदेहास्पद गतिविधियों की सूचना देकर अपने पास-पड़ोस की निगरानी में मदद करने के लिए स्वयंसेवक बनें।

  • खुल कर दान दें- आतंकवाद के शिकार लोगों की सच्ची मदद करने वालों की तलाश करें और उदारतापूर्वक दान दें।

  • पुलिस पर नजर- पुलिस थाने में जाकर देखें कि वहां खतरे से निबटने के लिए समुचित सुविधाएं, पुलिस बल और हथियार हैं या नहीं।

  • मुस्तैद रहें- आतंकवादियों से निबटने का प्रशिक्षण लें, इसके लिए नागरिक प्रशासन से प्रशिक्षण केंद्र का पता मालूम करें।

  • पहचान का प्रमाण- राष्ट्रीय आईडी कार्ड व्यवस्था के तहत हर नागरिक को पंजीकृत कराने का अभियान बनाएं।

  • अपराधियों को खारिज करें- आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को चुनाव में वोट न देने का संकल्प लें।

  • जुर्माना भरें- दंडित किये जाने पर अधिकारियों को रिश्वत देने के बदले अपना जुर्माना भरें।

  • सुरक्षा पर निगरानी- आपके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ते हैं उनके प्रबंधकों और आप जहां काम करते हैं, उस कार्यालय से कहें कि इमारत की बनावट के खाके की प्रतियां बनाएं।

  • अपने पड़ोस पर नजर रखें- अपने पास-पड़ोस पर नजर रखें। संदिग्ध हरकतों और व्यक्तियों की सूचना पुलिस को दें।

  • अच्छी तरह लैस रहें- आपातकालीन स्थिति में जरूरी उपायों के लिए अपनी निवासी कल्याण समिति से विवरण हासिल करें।

  • संपर्क नंबर रखें- अपने क्षेत्र के आपातकालीन सेवा केंद्रों की सूची रखें, जिसमें उनका पता और फोन नंबर हो।

  • भरोसे के लोग रखें- अपने यहां भरोसे के लोगों को ही काम पर रखें और किरायेदार की पुलिस जांच अवश्य कराएं।

  • मिलन स्थल बनाएं- अपने पड़ोस में ऐसे स्थान तय करें जहां आपात के समय लोग एकत्र हो सकें।

  • नक्शा रखें- अपने कार्य के स्थल और बच्चे के स्कूल तक आने-जाने के लिए वैकिल्पक मार्ग खोज कर रखें।

  • आगे आएं- अगर आप आतंकवादी हमले के साक्षी हैं तो गवाही के लिए आगे आयें।

  • धैर्य रखें- सार्वजनिक स्थानों और वाहनों में सामान की जांच के कारण देरी होने पर धैर्य रखें।

  • आपात योजना- परिवार के लिए आपात योजना बनाएं और मित्रों के साथ इसका अभ्यास करें।

यदि उपरोक्त सुझावों पर सरकार और सभी नागरिक गौर करें और इन्हें अमल में लाया जाये तो निश्चित रूप से आतंकवाद के खिलाफ मुहिम के निर्णायक परिणाम प्राप्त होंगे। आइये, एक बार फिर शपथ लें कि आतंकवाद को मिटाना है और भारत में शांति, अमन, सुख और समृध्दि लानी है।


जय हिन्द
नीरज कुमार दुबे

3 comments:

कविता वाचक्नवी said...

Achchha laga lekh.

Aap ka yah lekh Yahoo samooh Hindi-Bharat ( http://groups.yahoo.com/group/HINDI-BHARAT/ )

par sadasyon ke pathanaarth preshit kar rahi hoon.

संगीता पुरी said...

बहुत अच्‍छा आलेख है.....इंडिया टूडे ने आतंकवाद के खिलाफ लडाई के लिए महत्‍वपूर्ण सुझावों पर विशेषांक निकालकर सराहनीय कार्य किया है....मैं भी पढ रही हूं।

jayram said...

ladai gambhir hai jara sochna to padega ..........kise lade bahar ke dushmano se ya andar ke gaddaron se ..............waise is aatankwad se kahin jyda log bhukh se mar rahe hain uska ilaj kabhi socha hai aapne..............pichhle 2-3 mahine se mahool garam hai .koi amerika to koi israil ke tarj par loha lene ki baat karta hai .....lakin bhai wahan ki paristhiti aur apni fatehali ka aanklan to karo ............media to puri tarah se yuddhonmad paida karne main juti hai .....are pahle bhay,bhukh aur bhrashtachar se nijat pa lo fir aatankwad ki baat karna aur aatank ko badhane main isi tino karkon ka haath hai...