
26 जनवरी 2009 को जब गणतंत्र दिवस की परेड देखने गया तो भारत भर की सांस्कृतिक छटा तो राजपथ पर देखने को मिली ही साथ ही देश के उन महान शहीदों को याद करने का भी मौका मिला जिन्होंने मुस्कुराते हुये अपने प्राण देश पर न्योछावर कर दिये। इस वर्ष जिन शहीदों को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनका नाम लिये जाने पर आंखें भर आईं और उनके अमर बलिदान को याद कर यही शपथ ली कि भारत मां तेरे लाल तुम पर कभी आंच नहीं आने देंगे। यहां एक मशहूर कविता की कुछ लाइनें व्यक्त कर अपने हृदय में उभर रही भावनाओं को व्यक्त कर रहा हूं।
मन समर्पित, तन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं
मां तुम्हारा ऋण बहुत है मैं अकिंचन
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन
थाल में लाऊं सजा कर भाल जब भी
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन
थाल में लाऊं सजा कर भाल जब भी
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण
गान अर्पित प्राण अर्पित
रक्त का कण कण समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं
रक्त का कण कण समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं
मांज दो तलवार, लाओ न देरी
बांध दो कस कर कमर पर ढाल मेरी
भाल पर मल दो चरण की धूल थोड़ी
शीश पर आशीष की छाया घनेरी
बांध दो कस कर कमर पर ढाल मेरी
भाल पर मल दो चरण की धूल थोड़ी
शीश पर आशीष की छाया घनेरी
स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित
आयु का क्षण क्षण समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं
आयु का क्षण क्षण समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं
तोड़ता हूं मोह का बन्धन, क्षमा दो
गांव मेरे, द्वार, घर, आंगन क्षमा दो
आज सीधे हाथ में तलवार दे दो
और बायें हाथ में ध्वज को थमा दो
गांव मेरे, द्वार, घर, आंगन क्षमा दो
आज सीधे हाथ में तलवार दे दो
और बायें हाथ में ध्वज को थमा दो
यह सुमन लो, यह चमन लो
नीड़ का त्रण त्रण समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं
इस वर्ष जिन लोगों को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। आइये जानते हैं उनकी वीर गाथाओं के बारे में-
श्री आर. पी. डेंगदोह, मेघालय पुलिस सेवा
नीड़ का त्रण त्रण समर्पित
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं
इस वर्ष जिन लोगों को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। आइये जानते हैं उनकी वीर गाथाओं के बारे में-
श्री आर. पी. डेंगदोह, मेघालय पुलिस सेवा
6 नवंबर, 2007 को यह सूचना मिली कि स्वचालित राइफलों तथा बड़ी मात्रा में विस्फोटकों से लैस लगभग दस उग्रवादियों ने मेघालय के जंगलों में एक शिविर डाल रखा है। श्री आर. पी. डेंगदोह उग्रवादियों के विरुध्द कार्रवाई में पुलिस दल को नेतृत्व प्रदान करने के लिए स्वेच्छा से आगे आये। पुलिस दल अगले दिन सूर्योदय से ठीक पहले मौके पर पहुंचा तथा उग्रवादियों को शिविर से बाहर खदेड़ने के लिए शिविर पर टूट पड़ा। उग्रवादियों ने आक्रमण दल पर भारी गोलीबारी कर दी। श्री डेंगदोह ने बहादुरी से गोलीबारी का जवाब दिया तथा एक उग्रवादी को मार गिराया। तथापि, उनको भी एक गोली लग गई। गंभीर घाव की परवाह न करते हुये उन्होंने दल का नेतृत्व जारी रखा तथा दो दुर्दांत उग्रवादियों को बंदी बनाने में कामयाब हो गये।
श्री आर। पी. डेंगदोह ने उग्रवादियों के विरुध्द लड़ाई में अनुकरणीय कर्तव्यपरायणता तथा उत्कृष्ट बहादुरी का प्रदर्शन किया तथा सर्वोच्च बलिदान दिया।
सहायक कमाण्डेंट श्री प्रमोद कुमार सत्पथी
विशेष आपरेशन ग्रुप, उड़ीसा राज्य सशस्त्र पुलिस के प्रशिक्षण प्रभारी
विशेष आपरेशन ग्रुप, उड़ीसा राज्य सशस्त्र पुलिस के प्रशिक्षण प्रभारी
15 फरवरी, 2008 की रात भारी मात्रा में हथियारों से लैस 500 से भी अधिक नक्सलवादियों ने भुवनेश्वर के इर्द-गिर्द अनेक स्थानों पर एक साथ पुलिस पर आक्रमण कर दिया तथा बहुत से हथियार लूट लिये और कई पुलिस कर्मियों को मार दिया। तत्पश्चात् वे पास के जंगलों में छिप गये।
विशेष आपरेशन ग्रुप के सहायक कमाण्डेंट, प्रमोद कुमार सतपथी मात्र 20 पुलिस कर्मियों के साथ जंगल के अंदर ऊंचे स्थान पर मोर्चा लिये नक्सलियों के पास पहुंचे और उन पर तुरंत धावा बोल दिया। नक्सलियों ने पुलिस दल पर भारी गोलीबारी की और लगभग दो घंटे तक चलने वाली भीषण मुठभेड़ में श्री सतपथी ने अनुकरणीय बहादुरी के साथ ऑपरेशन का नेतृत्व किया तथा सर्वोच्च बलिदान दिया।
श्री प्रमोद कुमार सतपथी ने नक्सलियों के विरुध्द लड़ते हुये उच्च कोटि की वीरता तथा कर्तव्यपरायणता का प्रदर्शन किया।
आई सी- 45618 कर्नल जोजन थॉमस
जाट रेजिमेंट/45 राष्ट्रीय राइफल
जाट रेजिमेंट/45 राष्ट्रीय राइफल
जम्मू-कश्मीर में तैनात 45 राष्ट्रीय राइफल बटालियन के कमान अफसर कर्नल जोजन थॉमस को 22 अगस्त, 2008 को प्रात: 03.30 बजे एक आतंकवादी समूह का पता चला। कर्नल थॉमस उपलब्ध सैनिकों के साथ तुरंत उस क्षेत्र की ओर गये और शीघ्र ही भयंकर गोलीबारी शुरू हो गयी। मोर्चे पर अगुवाई करते हुये कर्नल थॉमस शीघ्र आगे बढ़े तथा बिल्कुल नजदीक से दो आतंकवादियों का सफाया कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान उन्हें गोलियों के गंभीर घाव लगे। इसके बावजूद उन्होंने गुत्थम-गुत्था की भयंकर लड़ाई में तीसरे दुर्दांत आतंकवादी का सफाया कर दिया।
कर्नल जोजन थॉमस ने तीन कट्टर आतंकवादियों का सफाया करने में अनुकरणीय नेतृत्व तथा असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन किया तथा राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
श्री मोहन चन्द शर्मा, निरीक्षक, दिल्ली पुलिस
श्री मोहन चन्द शर्मा, इन्सपेक्टर, दिल्ली पुलिस को 19 सितम्बर 2008 को एक खास सूचना मिली कि दिल्ली श्रृंखलाबध्द बम धमाकों के संबंध में वांछित एक संदिग्ध व्यक्ति जामिया नगर, दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र में स्थित बाटला हाउस के एक फ्लैट में छिपा हुआ है।
श्री शर्मा सात सदस्यीय दल का नेतृत्व करते हुये तुरंत उस फ्लैट पर पहुंचे। ज्यों ही उन्होंने फ्लैट में अन्य दरवाजे से प्रवेश किया, उनको फ्लैट के अंदर छुपे हुये आतंकवादियों की ओर से गोलीबारी का पहली बौछार लगी। निर्भीकता के साथ उन्होंने गोलीबारी का जवाब दिया। इस प्रकार शुरू हुई दोनों तरफ की गोलीबारी में दो आतंकवादी मारे गये तथा एक पकड़ा गया।
श्री मोहन चन्द शर्मा ने आतंकवादियों से लड़ते हुये अनुकरणीय साहस कर्तव्यपरायणता का प्रदर्शन किया तथा राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
13621503 हवलदार बहादुर सिंह बोहरा
10वीं बटालियन पैराशूअ रेजिमेंट (विशेष बल)
10वीं बटालियन पैराशूअ रेजिमेंट (विशेष बल)
हवलदार बहादुर सिंह बोहरा जम्मू-कश्मीर के लवांज के सामान्य क्षेत्र में तलाशी आपरेशन हेतु तैनात आक्रमण दल के स्क्वाड कमांडर थे। उन्होंने 25 सितम्बर, 2008 को शाम 6.15 बजे आतंकवादी दल को देखा तथा उन्हें बीच में ही रोकने के लिए शीघ्रता से आगे बढ़े। इस प्रक्रिया के दौरान, हवलदार बहादुर सिंह बोहरा शत्रु की भारी गोलीबारी की चपेट में आ गये। निर्भीकता के साथ वह आतंकवादियों पर टूट पड़े तथा उनमें से एक को मार गिराया। तथापि, उन्हें गोलियों के गहरे घाव लगे। सुरक्षित स्थान पर ले जाये जाने से इंकार करते हुये उन्होंने आक्रमण जारी रखा तथा बिल्कुल नजदीक से दो और आतंकवादियों को मार गिराया।
इस प्रकार, हवलदार बहादुर सिंह बोहरा ने आतंकवादियों के विरुध्द लड़ाई में अत्यधिक असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया तथा राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
श्री हेमन्त कमलाकर करकरे
संयुक्त पुलिस आयुक्त, महाराष्ट्र
संयुक्त पुलिस आयुक्त, महाराष्ट्र
26 नवम्बर, 2008 को रात्रि 9.40 बजे श्री हेमन्त कमलाकर करकरे, संयुक्त पुलिस आयुक्त तथा आतंकवादी रोधी दस्ते के प्रमुख को छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन, मुंबई पर आतंकवादियों के आक्रमण के बारे में सूचना मिली।
त्वरित कार्रवाई करते हुये श्री करकरे ने बच निकलने के संभावित रास्तों पर दल भेजे और स्वयं एक छोटी सी टुकड़ी लेकर कामा अस्पताल की ओर चल पड़े जहां तब तक आतंकवादी पहुंच चुके थे। आतंकवादियों और पुलिस दल के बीच भारी गोलीबारी हुई। इसके परिणामस्वरूप आतंकवादी अपनी जगह बदलने के लिए मजबूर हो गये। श्री करकरे ने आतंकवादियों का पीछा किया। लेकिन इस कार्रवाई में उनकी जीप पर घात लगाकर हमला किया गया जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गये। फिर भी, वे आपरेशन का नेतृत्व करते रहे और एक आतंकवादी को बुरी तरह घायल कर पाने में सफल हो गये।
श्री हेमन्त कमलाकर करकरे ने आतंकवादियों के विरुध्द लड़ाई में उच्चकोटि के साहस और नेतृत्व का प्रदर्शन किया और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
श्री अशोक मारुतराव काम्टे
अपर पुलिस आयुक्त, महाराष्ट्र
26 नवम्बर, 2008 को भारी मात्रा में हथियारों से लैस दस आतंकवादियों ने मुंबई के विभिन्न स्थानों पर एक साथ आक्रमण कर दिया। श्री अशोक मारुतराव काम्टे, अपर पुलिस आयुक्त उस पुलिस टुकड़ी में शामिल थे जो दौड़कर कामा अस्पताल पहुंची थी जहां आतंकवादी घुस गये थे। आतंकवादी तथा पुलिस टुकड़ी के बीच गोलीबारी की लड़ाई शुरू हो गई। परिणामस्वरूप आतंकवादी अपनी स्थिति बदलने के लिए मजबूर हो गये थे। पुलिस टुकड़ी ने आतंकवादियों का पीछा किया परंतु इस कार्रवाई में उनकी जीप पर घात लगाकर हमला कर दिया गया तथा श्री काम्टे गंभीर रूप से घायल हो गये थे। तथापि, उन्होंने लड़ाई जारी रखी तथा एक आतंकवादी को घायल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्री अशोक मारुतराव काम्टे ने आतंकवादियों के विरुध्द लड़ाई में उच्चतम कोटि के साहस तथा नेतृत्व का प्रदर्शन किया तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
श्री विजय सहदेव सालस्कर, इंस्पेक्टर
अपकर्षण रोधी प्रकोष्ठ, (एंटी एक्सटोर्शन सेल) अपराध शाखा, महाराष्ट्र
अपकर्षण रोधी प्रकोष्ठ, (एंटी एक्सटोर्शन सेल) अपराध शाखा, महाराष्ट्र
26 नवम्बर, 2008 को भारी मात्रा में हथियारों से लैस दस आतंकवादियों ने मुंबई के विभिन्न स्थानों पर एक साथ धावा बोला। श्री विजय सहदेव सालस्कर, इंस्पेक्टर, अपकर्षण रोधी प्रकोष्ठ, अपराध शाखा, उस पुलिस टुकड़ी में शामिल थे जो दौड़कर कामा अस्पताल पहुंची थी जहां आतंकवादी घुस गये थे। आतंकवादी तथा पुलिस टुकड़ी के बीच गोलीबारी की लड़ाई शुरू हो गई। परिणामस्वरूप आतंकवादी अपनी स्थिति बदलने के लिए मजबूर हो गये थे। पुलिस टुकड़ी ने आतंकवादियों का पीछा किया परंतु इस कार्रवाई में उनकी जीप पर घात लगाकर हमला कर दिया गया तथा श्री सालस्कर गंभीर रूप से घायल हो गये थे। तथापि उन्होंने लड़ाई जारी रखी तथा एक आतंकवादी को घायल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्री विजय सहदेव सालस्कर ने विकट परिस्थितियों में अदम्य तथा अतुल्य साहस का प्रदर्शन किया और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
श्री तुकाराम गोपाल ओम्बले
सहायक पुलिस उपनिरीक्षक, महाराष्ट्र
सहायक पुलिस उपनिरीक्षक, महाराष्ट्र
26 नवम्बर, 2008 को श्री तुकाराम गोपाल ओम्बले, सहायक पुलिस उप निरीक्षक डी बी मार्ग पुलिस स्टेशन में रात्रि डयूटी पर थे जब मुंबई पर आतंकवादियों ने धावा बोला था। आधी रात के करीब वायरलेस पर यह संदेश गया कि दो आतंकवादी एक कार में मेरिन ड्राइव की ओर भाग रहे हैं। श्री ओम्बले ने इसे रोकने के लिए तुरंत बेरीकेड लगा दिये। ज्यों ही, आतंकवादियों की कार रुकी उसके अंदर बैठे एक आतंकवादी ने गोलीबारी शुरू कर दी। श्री ओम्बले हिम्मत दिखाते हुये कार की बायीं ओर दौड़े और एके-47 राइफल को छीनने के लिए एक आतंकवादी को धर दबोचा। इस कार्रवाई के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गये और बाद में घावों के कारण्ा वीर गति को प्राप्त हुये।
श्री तुकाराम गोपाल ओम्बले ने आतंकवादियों के विरुध्द लड़ाई में अदम्य साहस तथा असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन किया और सर्वोच्च बलिदान दिया।
आई सी- 58660 मेजर संदीप उन्नीकृष्णन
बिहार रेजिमेंट/51 स्पेशल एक्शन ग्रुप
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने होटल ताज महल से आतंकवादियों को मार भगाने के लिए 27 नवम्बर, 2008 को किये गये कमांडो आपरेशन का नेतृत्व किया जिसमें उन्होंने 14 बंधकों को छुड़ाया। आपरेशन के दौरान उनकी टुकड़ी पर भारी गोलीबारी होने लगी जिसमें उनकी टुकड़ी का एक सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गया। मेजर संदीप ने निशाने पर गोलीबारी करके आतंकवादियों को घेर लिया और घायल कमांडो को सुरक्षित जगह ले जाकर बचा लिया। इस कार्रवाई के दौरान उनके दाएं हाथ में गोली लग गई थी। चोट के बावजूद आखिरी दम तक वे आतंकवादियों के खिलाफ लड़ते रहे।
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने सखाभाव तथा ऊंचे दर्जे के नेतृत्व के साथ-साथ उत्कृष्ट वीरता का प्रदर्शन किया और राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
4073611 हवलदार गजेन्द्र सिंह
पैराशूट रेजिमेंट/51 स्पेशल एक्शन ग्रुप
पैराशूट रेजिमेंट/51 स्पेशल एक्शन ग्रुप
27 नवम्बर, 2008 की रात हवलदार गजेन्द्र सिंह, नरीमन हाउस, मुंबई में आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाये गये लोगों को बचाने के लिए किये जा रहे आपरेशन में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। भवन की अंतिम मंजिल से आतंकवादियों का सफाया करने के बाद वे उस जगह पर जा पहुंचे जहां पर आतंकवादियों ने मोर्चा ले रखा था। ज्यों ही वे अंदर दाखिल हुये, आतंकवादियों ने ग्रेनेड से उन्हें घायल कर दिया। अडिग रहकर वह गोलियां बरसाते रहे और प्रतिपक्षी की भारी गोलियों का सामना करते हुये उन्होंने आतंकवादियों को घेर लिया। इस कार्रवाई में उन्होंने एक आतंकवादी को घायल कर दिया और अन्यों को कमरे के अंदर ही वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने मुठभेड़ जारी रखी लेकिन घावों के कारण वे वीरगति को प्राप्त हो गये।
हवलदार गजेन्द्र सिंह ने अति प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट वीरता का प्रदर्शन किया और आतंकवादियों के खिलाफ लड़ते हुये राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
नोट:- अशोक चक्र से सम्मानित शहीदों की वीरगाथा भारत सरकार की ओर से 26 जनवरी, 2009, सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह स्थल पर वितरित की गई पुस्तिका अशोक चक्र से साभार ली गई है।
जय हिन्द
नीरज कुमार दुबे
नीरज कुमार दुबे